UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी थोड़ी जटिल है, लेकिन चयन तो होते ही हैं। चयनित होने या न होने वाले अभ्यर्थी में ज्ञान का अंतर नगण्य हो सकता है यहाँ तक कि कई बार चयनित न होने वाला अभ्यर्थी तुलनात्मक रूप से अधिक ज्ञानी होता है। प्रश्न उठता है कि फिर चयनित होंने की रणनीति क्या है? संस्कृति IAS Coaching से चयनित अनेक विद्यार्थी के अनुभवों का निचोड़ है कि UPSC अभ्यर्थियों से कुछ ख़ास अपेक्षाएं रखता है। यदि अभ्यर्थी इन अपेक्षाओं को एक सटीक रणनीति से पूरा करते हैं तो चयन आसान हो जाता है। इस लेख में आज अनेक चयनित अभ्यर्थियों द्वारा सुझाई गई कुछ कॉमन रणनीतियों पर बात करेंगे।

संस्कृति IAS Coaching के UPSC में चयनित छात्रों द्वारा सुझाई गई युक्तियाँ
1. बेसिक अध्ययन- इमारत की मजबूती उसकी नींव से तय होती है अभ्यर्थियों जितनी बेहतर बेसिक तैयारी करेंगे आगे उसे अद्यतन करना आसान हो जाता है। सर्वप्रथम सम्पूर्ण पाठ्यक्रम को समझे और अपनी बेसिक तैयारी को NCERT की पुस्तकों से सम्पूर्णता दें।
2. विस्तृत अध्ययन- विषयों की बेसिक जानकारी के उपरान्त प्रमाणिक पुस्तकों से ज्ञान को बढाएं। UPSC द्वारा पूछे जा रहे प्रश्नों की प्रकृति को देखते हुए अपने परम्परागत ज्ञान को विश्वसनीय स्त्रोतों से अद्यतन करना आवश्यक है।
3. शार्ट नोट्स या सिनाप्सिस- परीक्षा का पाठ्यक्रम विस्तृत है। पढ़े हुए को परीक्षा तक याद रखना आसान नहीं है। परीक्षा के अंतिम समय में दोहरा पाना भी कठिन है। इसलिए अध्ययन के क्रम में ही शार्ट नोट्स बनाते चलें। पुस्तक पढ़ने के क्रम में महत्वपूर्ण जानकारियों को रेखांकित या हाईलाईट कर दें। तीव्र दोहराव में इन पर ध्यान आकर्षण संभव होगा।
4. अन्तः विषयक दृष्टिकोण- किसी विषय को पढ़ने एवं लिखने के क्रम में उस विषय को विभिन्न विषयों से जोड़कर देखना चाहिए। ये लेखन में पैनापन लाएंगे। एकल विषयक दृष्टिकोण से प्रभावी उत्तर लिखना कठिन है।
5. अभिव्यक्ति कौशल- UPSC अभ्यर्थी के ज्ञान की जाँच उसके द्वारा की गई अभिव्यक्ति के माध्यम से करता है, वो लिखित हो, मौखिक हो या फिर सांकेतिक/शारीरिक। आयोग द्वारा अभ्यर्थी की इसी अभिव्यक्ति का मूल्याँकन कर दिया जाता है। तैयारी के क्रम में कुछ प्रयास करना चाहिए एवं कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए, जिसमें कुछ निम्नलिखित हैं-
• अध्याय से संबंधित प्रश्नों का अभ्यास अवश्य करें
• नियमित उत्तर लेखन करें
• वर्तनी, भाषा, वाक्य-विन्यास मानक स्तर के हों
• पूर्व में आए प्रश्नो का अवलोकन/हल करते रहें, आदि
6. स्वतः परीक्षण- यह अर्जित ज्ञान के मूल्यांकन का सबसे बेहतर तरीका है। अध्ययन से संबंधित चिन्तन-मनन से अपने अध्ययन को जांचते रहें। सीखे ज्ञान को लिखने का प्रयास करें। स्वय से जांचें और मूल्यांकन करें। स्वतः परीक्षण से सुधार की संभावनाएं अधिक होती हैं। चूँकि अंतरात्मा की संतुष्टि का स्तर ऊँचा होता है।
7. परस्पर परीक्षण- आपस में किसी प्रासंगिक मुद्दे पर परिचर्चा के भी अपने महत्त्व हैं। तैयारी कर रहे गंभीर अभ्यर्थियों का छोटा समूह बना लें। परिचर्चा के जरिए कम समय में अनेक सूचनाएं साझा कर सकते हैं। कोशिश करते रहे कि परिचर्चा उद्देश्य से विचलित न हो।
7. संपूर्णता देने के लिए कोचिंग- जैसा कि इस परीक्षा का पाठ्यक्रम विस्तृत है एवं इसकी प्रकृति में वैविध्यता है। तैयारी को कम समय में सम्पूर्णता देने के लिए एक बेहतर एवं विश्वसनीय कोचिंग संस्था से जुड़ जाएँ।
• ऐसी कोचिंग संस्था का चुनाव करें, जहाँ तैयारी को सम्पूर्णता देने के लिए प्रत्येक चरण में प्रशिक्षण की व्यवस्था हो।
• कोचिंग आपकी तैयारी को चरणबद्ध तरीके से पूरा करते हुए कम समय में सम्पूर्णता प्रदान करेगी।
• अनुभवी अध्यापकों के अनुभव आपकी तैयारी का सटीक मार्ग प्रशस्त करेंगे।
• कोचिंग में आयोजित होने वाले क्लास टेस्ट, टेस्ट सीरीज के माध्यम से स्वयं के ज्ञान के स्तर का मूल्यांकन संभव होता है।
धैर्य, निरंतरता, अनुशासन के साथ यदि उक्त रणनीति से अपनी तैयारी को सम्पूर्णता देते हैं तो निश्चित रूप से सफल होंगे। संस्कृति IAS Coaching अपने अनुभवी शिक्षकों के साथ छात्रों को उचित मार्गदर्शन दे रहा है जिससे कि वे UPSC जैसी कठिन परीक्षा जल्द ही पार कर पाएं। अगर आप भी UPSC की तैयारी कर रहे हैं और अपने लिए भरोसेमंद मर्दर्शक तलाश रहे हैं तो संस्कृति आपके लिए बेहतर स्थान हो सकता है।
